शिशु पर वायु प्रदूषण का प्रभाव व बचाने के टिप्स | Shishu Ko Air Pollution Se Hone Wali Bimari

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स्वास्थ्य पर वायु प्रदूषण का दुष्प्रभाव वैश्विक स्तर पर दिख रहा है। बड़ों के साथ ही बच्चों के स्वास्थ्य पर भी वायु प्रदूषण का नकारात्मक प्रभाव देखा जा रहा है। इसी कारण से बढ़ते वायु प्रदूषण व उससे बच्चे की सेहत पर होने वाले बुरे असर के प्रति लोगों की चिंता गंभीर हो गई है। यही वजह है कि मॉमजंक्शन शिशु को वायु प्रदूषण से कैसे बचाएं, इसके उपाय बता रहा है। साथ ही वायु प्रदूषण से होने वाली बीमारी की जानकारी भी यहां दी गई है।

सबसे पहले यह पढ़ें कि शिशु को एयर पॉल्यूशन से अधिक खतरा क्यों है।

वायु प्रदूषण का असर शिशु पर ज्यादा क्यों होता है?

एनसीबीआई (नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन) पर जारी रिसर्च के अनुसार, बाल रोग विशेषज्ञ व अमेरिकन अकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स की पर्यावरणीय स्वास्थ्य समिति भी बढ़ते वायु प्रदूषण व बच्चों की सेहत पर उसके नकारात्मक प्रभाव को लेकर चिंतित हैं। उनके अनुसार, वायु प्रदूषण ने बच्चों के स्वास्थ्य को सबसे अधिक प्रभावित किया है, जिसके पीछे कई कारण शामिल हैं (1)।

यही वजह है कि विकसित देशों में प्रसव के दौरान शिशु मृत्यु दर का जोखिम भी अधिक देखा जा रहा है (1)। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर वायु प्रदूषण ने 93% बच्चों का स्वास्थ्य प्रभावित किया है। WHO ने 5 वर्ष की आयु में होने वाली बच्चों की मौतों का कारण वायु प्रदूषण को बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, हर पांच में से एक से अधिक बच्चे की मौत सीधे तौर पर वायु प्रदूषण से जुड़ी है (2)।

वायु प्रदूषण का शिशु की स्वास्थ्य पर प्रभाव के बारे में नीचे विस्तार से बताया गया है।

शिशु को वायु प्रदूषण (Air Pollution) से होने वाली बीमारियां | Shishu par vayu pradushan ke prabhav

एनसीबीआई की वेबसाइट पर जारी रोग महामारी विज्ञान की रिपोर्ट के अनुसार, पर्यावरण में ओजोन (O3), पार्टिकुलेट मैटर (PM), नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO2), सल्फर डाइऑक्साइड (SO2), कार्बन मोनोऑक्साइड और लेड जैसे तत्वों के बढ़ने से वायु प्रदूषण चिंताजनक बना है। इसी वजह से बच्चों के स्वास्थ्य पर कई तरह के नकारात्मक प्रभाव पड़ रहे हैं, जो निम्नलिखित हैं (1)।

  1. सडन इन्फेंट डेथ सिंड्रोम (Sudden Infant Death Syndrome) – एनसीबीआई की रिपोर्ट के अनुसार, वायु प्रदूषण के कारण नवजात बच्चों में श्वसन संबंधी समस्याएं बढ़ गई हैं, जिस वजह से विकसित देशों में सडन इन्फेंट डेथ सिंड्रोम या अचानक शिशु मृत्यु सिंड्रोम की दर अधिक हो गई है। इसका सबसे अधिक जोखिम पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों को है।
  1. भ्रूण पर नकारात्मक प्रभाव – हवा की खराब गुणवत्ता शिशु के भ्रूण रूप पर भी नकारात्मक प्रभाव दिखा सकती है। इसके कारण समय से पहले शिशु का जन्म, जन्म के समय शिशु का कम वजन, अंतर्गर्भाशयी विकास मंदता यानी गर्भ के अंदर भ्रूण का खराब विकास, जन्म के समय शिशु का असामान्य कद, सिर का बिगड़ा हुआ आकार और गर्भावस्था के चरण छोटे हो सकते हैं।
  1. हृदय जन्मदोष – हवा में कार्बन मोनोऑक्साइड की बढ़ी हुई मात्रा वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट का जोखिम बढ़ा सकता है। ऐसी स्थिति में गर्भ से ही शिशु के दिल के बीच की दीवार में छेद हो सकता है। साथ ही यह जन्मदोष पल्मोनरी आर्टरी और वाल्व में खराबी के जोखिम से भी जुड़ा है।
  1. सांस की बीमारी – खराब वायु के कारण फेफड़ों का कार्य प्रभावित होता है, जिस वजह से बच्चे में अस्थमा व सांस से जुड़ी अन्य समस्याएं हो सकती हैं। खासकर, उन बच्चों में इसका जोखिम अधिक होता है, जो नियमित रूप से खेल से जुड़ी गतिविधियों में शामिल होते हैं (1)। वायु प्रदूषण से कई श्वसन रोगों के साथ ही फेफड़ों व सांस की नली से जुड़े संक्रमण हो सकते हैं (3)।
  1. एलर्जी रोग – कई अध्ययनों से पता चलता है कि ट्रैफिक से निकलने वाले धुएं के संपर्क में आने से बचपन के अस्थमा के साथ ही  बच्चों में सांस संबंधी एलर्जी रोग भी हो सकता है। यह बच्चों में एलर्जिक राइनाइटिस का कारण भी बन जाता है (4)।
  1. सर्दी-खांसी – सिर्फ बाहरी वायु प्रदूषण ही नहीं, बल्कि घर के अंदर की वायु प्रदूषित होगी, तो भी बच्चे की श्वसन क्रिया प्रभावित हो सकती है। शोध के अनुसार, अगर घर के अंदर कोई धूम्रपान करता है, तो इससे बच्चों को खांसी, सामान्य सर्दी और गले में जमाव के साथ ही अधिक थूक आना, सांस की तकलीफ व घरघराहट की समस्या हो सकती है (5)।
  1. कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली – वायु प्रदूषकों के संपर्क में आने से बच्चों की प्रतिरक्षा प्रणाली में परिवर्तन हो सकता है। अध्ययन के अनुसार, वायु प्रदूषण बच्चों की प्रतिरक्षा प्रणाली की कोशिका (Cellular) के साथ ही उनमें पाए जाने वाले तरल पदार्थ (Humoral) को भी बदल सकता है। इसके कारण बच्चों की इम्यूनिटी धीरे-धीरे कमजोर हो सकती है।
  1. रिकेट्स – अधिक वायु प्रदूषित क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों में विटामिन डी की कमी ज्यादा होती है, जिससे उनमें रिकेट्स का जोखिम बढ़ता है। विटामिन डी के लिए सूर्य की किरणों की आवश्यकता पड़ती है। साथ ही वायु प्रदूषण के कारण हवा में धुंध अधिक होने से सूर्य की रोशनी के विटामिन डी में बदलने की प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है। बता दें कि रिकेट्स होने पर बच्चों की हड्डियां नरम व कमजोर हो जाती हैं (6)।
  1. केंद्रीय तंत्रिका तंत्र से जुड़ी बीमारियां – एनसीबीआई के एक अन्य अध्ययन के अनुसार, वायु प्रदूषण न्यूरोइन्फ्लेमेशन, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस, सेरेब्रोवास्कुलर डिसफंक्शन के साथ ही रक्त और मस्तिष्क के बीच के कार्य में परिवर्तन कर सकता है, जो केंद्रीय तंत्रिका तंत्र के रोगों को जन्म दे सकता है। इसकी वजह से स्ट्रोक, भूलने व कमजोर याददाश्त से जुड़ी बीमारियां, अल्जाइमर और पार्किंसंस रोग का खतरा भी बढ़ सकता है। इसके अलावा, यह न्यूरोडेवलपमेंटल डिसऑर्डर जैसे मानसिक विकार के जोखिम को भी बढ़ाता है (7)।

मतलब अगर किसी बच्चे में वायु प्रदूषण के कारण केंद्रीय तंत्रिका तंत्र संबंधी बीमारियां होती हैं, तो वह पढ़ने-लिखने में कमजोर हो सकता है। उसे ध्यान लगाने के साथ ही किसी विषय पर सोच-विचार करने, बातों को याद रखने में भी परेशानी हो सकती है।

कैसे बचाएं अपने शिशु को वायु प्रदूषण, इसके लिए नीचे बताए गए कारगर टिप्स पढ़ें।

छोटे बच्चों को वायु प्रदूषण से बचाने के टिप्स | How to protect newborns from air pollution in hindi

छोटे बच्चों को वायु प्रदूषण से कैसे बचाएं, यह जानने के लिए पेरेंट्स यहां बताए गए उपाय व टिप्स को पढ़ सकते हैं। यहां हमनें न सिर्फ इंडोर पॉल्यूशन के लिए टिप्स दिए हैं, बल्कि घर के बाहर के प्रदूषण से भी बच्चे को बचाए रखने के लिए सुझाव बताए हैं।

1. घर के अंदर न करें वायु प्रदूषण

लेख से यह जाहिर हो गया है कि न सिर्फ बाहर का दूषित पर्यावरण, बल्कि घर का दूषित माहौल भी बच्चे को प्रभावित कर सकता है। इसलिए, घर के अंदर किसी भी तरह के वायु प्रदूषण को न करें। उदाहरण के लिए, घर के अंदर धूम्रमान न करें, न ही घर में धुआं फैलने वाला कोई कार्य करें। अगर चूल्हे पर खाना बनाती हैं, तो उसकी जगह एलपीजी रसोई गैस का इस्तेमाल करें।

2. घर का वेंटिलेशन ठीक कराएं

इसका ध्यान रखें कि घर के अंदर वेंटिलेशन सिस्टम अच्छा हो। इससे घर के अंदर हो रहे वायु प्रदूषण को घर से बाहर निकालने में आसानी होगी। साथ ही घर में ताजी हवा भी आती रहेगी। इसके लिए घर को हवादार बनाएं। अगर उमस बढ़ जाए, तो कुछ देर के लिए खिड़कियां खोलें। इससे घर के अंदर ताजी हवा आएगी, जो हवा की गुणवत्ता में सुधार ला सकती है।

3. एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें

घर के अंदर की हवा को बेहतर बनाने के लिए अच्छी गुणत्ता वाले एयर क्लींजर, फिल्टर व एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल किया जा सकता है। यह वायु की गुणवत्ता में सुधार करके अस्थमा व सांस से जुड़े अन्य जोखिम कारकों को कम कर सकता है (3)। खासतौर पर अगर घर में छोटे बच्चे हैं, तो यह जरूरी भी माना जाता है, क्योंकि छोटे बच्चे अपना अधिकतर समय घर के अंदर गुजारते हैं।

4. हवा को साफ करने वाले इंडोर प्लांट लगाएं

एक शोध के अनुसार, एयर प्यूरीफायर भी कुछ तरह के वायु प्रदूषण पर प्रभावी नहीं हो सकते हैं। ऐसे में हवा को साफ करने वाले पौधे घर के अंदर लगाए जा सकते हैं। इस तरह के हाउसप्लांट कार्बन डाइऑक्साइड को हटाकर हवा में ऑक्सीजन की मात्रा को बढ़ा सकते हैं। इसके लिए घर में डेविल्स आइवी, एरेका पाम, लेडी पाम, बैंबू पाम, रबड़ प्लांट, ड्रेसिना, झाड़ खजूर जैसे पौधे लगा सकते हैं (8)।

5. मास्क पहनाएं

इसमें कोई दोराय नहीं कि बच्चों को कोविड-19 से सुरक्षित रखने में फेस मास्क को जरूरी माना गया है। अध्ययनों के अनुसार, छोटे बच्चों को सर्जिकल और कपड़े के मास्क पहना सकते हैं। इससे हवा का वेंटिलेशन भी अच्छा होगा और ऑक्सीजन की पूर्ति में कोई कमी भी नहीं आएगी (9)। ऐसे में वायु प्रदूषण से बचाव करने के लिए पेरेंट्स अपने बच्चे के लिए मास्क का उपयोग जरूर करें। खासतौर पर अगर बच्चा घर से बाहर है, तो उसे मास्क जरूर पहनाएं।

6. धुएं से दूरी

न सिर्फ घर के अंदर किया जाने वाला धुआं, बल्कि आस-पास के पर्यावरण में होने वाले धुआं भी वायु प्रदूषण का एक मुख्य कारण है। इसमें बढ़ता ट्रैफिक व यातायात मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। इसलिए, अपने बच्चों को ऐसे स्थानों पर जाने और धूमने-फिरने व खेलने से रोकें, जहां पर ट्रैफिक की आवाजाही अधिक हो। बच्चे के खेलने के लिए ऐसे पार्क का चयन करें, जो शहर के यातायात से दूर स्थित हों।

7. पर्याप्त पोषक तत्व खिलाएं

वायु प्रदूषण से होने वाले खतरे भले ही बाहरी परिवेश से जुड़े हैं, लेकिन इनका जोखिम कम करने में अच्छा व पौष्टिक आहार भी लाभकारी माना गया है। विटामिन सी, ई और एंटीऑक्सिडेंट से समृद्ध मछलियां, ताजे फल, हरी व पत्तेदार सब्जियों का सेवन करने से फेफड़ों के स्वास्थ्य पर लाभकारी प्रभाव होता है  (3)।

पौष्टिक आहार शरीर को ऑक्सीडेटिव प्रक्रिया से सुरक्षा देते हैं। इससे बच्चों के फेफड़े की कार्यक्षमता बेहतर होती है और श्वसन संबंधी जोखिम कम हो सकते हैं। साथ ही पौष्टिक आहार से प्रतिरक्षा प्रणाली भी मजबूत बनती है, जो वायु प्रदूषण सहित अन्य पर्यावरणीय कारकों से होने वाले नुकसान से शरीर को सुरक्षित देते हैं (3)।

8. बच्चों के बाहर जाने का समय तय करें

जब वायु प्रदूषण अधिक हो, उस समय बच्चों को घर से बाहर न जानें दें। आमतौर पर सुबह और शाम के समय यातायात व कारखानों की गतिविधियों में तेजी देखी जाती है। ऐसे में बच्चों के लिए घर से बाहर निकलना अर्ली मॉर्निंग में अच्छा रहेगा। अगर आस-पास शादी, त्योहर व कोई अन्य जश्न मनाया गया हो, तो उसके अगले दिन भी बच्चे को बाहर जाने से रोंकें। दरअसल, ऐसे मौकों पर लोग पटाखें जलाते हैं, जिसके धुएं से वायु प्रदूषण बढ़ता है।

9. अधिक सुगंधित चीजें दूर रखें

परफ्यूम या नेलपेंट जैसी सुगंधित व केमिकल युक्त चीजें बच्चे से दूर रखें। इनमें मौजूद हानिकारक केमिकल आसानी से हवा में घुल सकते हैं, जो बच्चे के शरीर पर टॉक्सिक प्रभाव डालते हैं। इसलिए, पेरेंट्स इसका खासतौर पर ध्यान रखें कि न ही वे इस तरह की चीजें बच्चे पर इस्तेमाल करें और खुद भी इनका इस्तेमाल करने से बचें।

10. पटाखों का उपयोग कम से कम करें

वैसे तो दिवाली व नए साल के लिए दिन लोग खुशी मनाने के लिए पटाखों का इस्तेनाल अधिक करते हैं, लेकिन शादी व अन्य जश्न पर भी पटाखों का खूब इस्तेमाल किया जाता है। जाहिर है बड़ों की आदतों से बच्चे यही सब सीखेंगे। इसलिए, पेरेंट्स को कभी भी अपने बच्चे को पटाखों का इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित नहीं करना चाहिए, बल्कि पटाखों से होने वाले नुकसान के बारे में बच्चे को उचित व जरूरी शिक्षा देनी चाहिए।

विभिन्न अध्ययनों से जाहिर है कि वायु प्रदूषण से शिशु को होने वाली बीमारियां कई देशों व संगठनों के लिए चिंताजनक बनी हुई है। राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसके निपटारे के लिए विभिन्न प्रयास भी किए जा रहे हैं, लेकिन अपने शिशु को एयर पॉल्यूशन से बचाने का मुख्य जिम्मा पेरेंट्स के कंधों पर ही होता है। ऐसे में शिशु को वायु प्रदूषण से होने वाली बीमारियों को गंभीरता से लेते हुए उन्हें वायु प्रदूषण से बचाने के लिए प्रयास करना चाहिए।

References:

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  1. The effects of air pollution on the health of children
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC2528642/
  2. Air pollution and child health: prescribing clean air
    https://www.who.int/publications/i/item/air-pollution-and-child-health
  3. Air pollution and chronic airway diseases: what should people know and do?
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC4740163/
  4. Ambient air pollution and allergic diseases in children
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC3382698/
  5. Indoor air pollution and respiratory function of children in Ashok Vihar, Delhi: an exposure-response study
    https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/19124297/
  6. Rickets
    https://medlineplus.gov/rickets.html
  7. The adverse effects of air pollution on the nervous system
    https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/22523490/
  8. Planting Healthier Indoor Air
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC3230460/
  9. The impact of face masks on children—A mini review
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC8014099/
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