बच्चों के लिए सोशल मीडिया के फायदे, नुकसान व प्रभाव | Impact Of Social Media On Children In Hindi

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आज के समय में सोशल मीडिया का विस्तार काफी तेजी से हो रहा है और इसमें बच्‍चों की मौजूदगी रफ्तार पकड़ रही है। देखा जा रहा है कि बच्चे छोटी उम्र से ही स्मार्टफोन के आदी होते जा रहे हैं और अपना अधिक समय इनके साथ बिताना पसंद कर रहे हैं। वहीं, बच्चों पर सोशल मीडिया के अच्छे और बुरे प्रभाव दोनों देखे गए हैं। यही वजह है कि मॉमजंक्शन के इस लेख में हमने बच्चों पर सोशल मीडिया के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रभावों को उजागर किया है। इस विषय में विस्तारपूर्वक जानकारी के लिए लेख को अंत तक जरूर पढ़ें।

तो चलिए जान लेते हैं कि सोशल मीडिया का बच्चों पर क्या प्रभाव पड़ता है।

सोशल मीडिया का बच्चों पर प्रभाव | Impact of Social Media on Children in Hindi

इसमें कोई दो राय नहीं कि सोशल मीडिया का उपयोग आज के समय में तेजी से हो रहा है। ऐसे में माता पिता को बच्चों पर पड़ने वाले इसके प्रभावों के बारे में पता होना चाहिए। बता दें कि सोशल मीडिया एक तरफ जहां बच्चों को फायदा पहुंचा सकता है, तो वहीं, दूसरी तरफ इसका अधिक इस्तेमाल बच्चों के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है।

इस पर हुए रिसर्च बताते हैं कि सोशल मीडिया बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है। इसके अलावा, बच्चों में सोशल मीडिया डिप्रेशन और साइबर बुलिंग (इंटरनेट माध्यम के जरिए किसी को तंग करना) का भी कारण बन सकता है (1)। लेख में आगे हमने बच्चों पर पड़ने वाले सोशल मीडिया के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रभावों की चर्चा विस्तार से की है।

नीचे स्क्रॉल कर पढ़ें बच्चों के लिए सोशल मीडिया किस प्रकार फायदेमंद है।

बच्‍चों के लिए सोशल मीडिया के फायदे | 12 Benefits of Social Media for Children in Hindi

सोशल मीडिया का उपयोग अगर सही तरीके से किया जाए, तो इसके कई फायदे सामने आ सकते हैं, जिसकी चर्चा हम नीचे विस्तारपूर्वक कर रहे हैं (2) :

1.असीमित सूचना का संसाधन :

बच्चों द्वारा सोशल मीडिया का उपयोग करने के फायदों में पहला फायदा है कि इस प्लेटफॉर्म के जरिए उन्हें असीमित सूचना का भंडार प्राप्त होता है। इसके माध्यम से बच्चे पढ़ाई के साथ-साथ अन्य गतिविधियों के बारे में भी ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं।

2.होमवर्क में मददगार :

अगर किसी बच्चे को अपना होमवर्क करने में परेशानी हो रही है, तो वह सोशल मीडिया की मदद से उसे पूरा कर सकता है। दरअसल, कई बार ऐसा होता है कि घर के बड़े अपने कामों में व्यस्त रहते हैं और उन्हें बच्चों का होमवर्क कराने की फुर्सत नहीं मिल पाती है। ऐसे में बच्चा सोशल मीडिया की मदद से अपना होमवर्क कर सकता है।

उदाहरण के तौर पर अगर बच्चे को होमवर्क में दिए गए किसी सवाल का जवाब नहीं मिल रहा है, तो वह यूट्यूब की मदद से उस सवाल के जवाब को समझ सकता है, जिससे उसे लिखने में काफी हद तक मदद मिल सकती है। इसके अलावा, फेसबुक के जरिए दोस्त या रिश्तेदार से जुड़कर वो पढ़ाई में मदद ले सकता है।

3.शिक्षकों से संपर्क करने में मददगार :

अगर बच्चा किसी कारणवश स्कूल नहीं जा पाता है और उसकी क्लास छुट जाती है, तो वह सोशल मीडिया की मदद से उसे पूरा कर सकता है। बच्चे वीडियो कॉल के माध्यम से अपने शिक्षकों से संपर्क कर सकते हैं और छुटी हुई क्लास के बारे में पूछ सकते हैं। इसके अलावा, बच्चे मैसेज के माध्यम से भी शिक्षकों से अपने डाउट्स क्लियर कर सकते हैं। कोरोना काल में इसका एक अच्छा उदाहरण देखा जा सकता है।

4.मनोरंजन का साधन :

टीवी के अलावा, सोशल मीडिया को भी मनोरंजन का एक शानदार साधन माना गया है। इसके जरिए बच्चे सकारात्मक चीजों को देखकर अपना मनोरंजन कर सकते हैं और उसमें दिखाई जाने वाली अच्छी आदतों को अपना सकते हैं। इसके अलावा, सोशल मीडिया के माध्यम से बच्चे स्डूको जैसी अन्य दिमाग वाले गेम्स खेल सकते हैं, इससे उनका मनोरंजन होने के साथ-साथ दिमाग भी शार्प होगा।

5.आत्मविश्वास में बढ़ोतरी :

सोशल मीडिया का एक फायदा यह भी है कि यह बच्चों को खुल कर बोलने का मौका देता है। जिससे बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ सकता है। बच्चे इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से खुलकर अपनी बातों को रख सकते हैं।

6.कौशल विकास में मददगार :

सोशल मीडिया बच्चों के लिए एक मंच प्रदान करता है, जहां बच्चे अपनी रुचि के अनुसार नई-नई चीजों को सीख सकते हैं। जैसे – संगीत, कला, खेल आदि। इससे बच्चों का स्किल डेवलप हो सकता है।

7.रिश्तेदारों से संपर्क बनाए रखने में मददगार :

दूर रह रहे रिश्तेदारों से भी सोशल मीडिया के जरिए संपर्क साधा जा सकता है। बच्चे इसके माध्यम से दूर रह रहे अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से वीडियो कॉल कर आसानी से बात कर सकते हैं। इससे रिश्ते की दूरी को कम करने में मदद मिल सकती है।

8.मूड ठीक करने में सहायक :

अगर किसी बच्चे का मूड ऑफ है, तो उसे ठीक करने में भी सहायक हो सकता है। दरअसल, सोशल मीडिया में ऐसी कई सकारात्मक मनोरंजन की चीजें उपलब्ध होती हैं, जिसे देखकर बच्चे में सकारात्मक बदलाव आ सकता है और उनका मूड भी ठीक हो सकता है।

9.जागरुकता फैलाने में सहायक :

सोशल मीडिया बच्चों में जागरूकता बढ़ाने में मदद कर सकता है। जिससे वे समाज में सकारात्मक परिवर्तन को बढ़ावा दे सकेंगे। बता दें कि सोशल मीडिया के जरिए कई जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं।

10.सामान्य ज्ञान और अन्य जरूरी खबरें :

सोशल मीडिया एक खुला मंच है, जहां हर चीज के बारे में जानकारी मिल सकती है। इसके माध्यम से बच्चे देश-विदेश में होने वाली घटनाओं से भी रूबरू हो सकते हैं और उनका ज्ञान बढ़ सकता है।

11.कम्युनिकेशन स्किल में बढ़ोतरी :

सोशल मीडिया के सही इस्तेमाल से बच्चों की कम्युनिकेशन स्किल्स बेहतर हो सकती है। यूट्यूब के वीडियो के माध्यम से बच्चे (हिंदी और इंग्लिश) बोलने का तरीका सीख सकते हैं। इससे बच्चे खुद को प्रेरित कर सकते हैं।

12.प्रतिभा दिखाने का मौका :

जैसा कि हमने लेख में बताया कि सोशल मीडिया एक खुला मंच है। यहां बच्चे अपनी रुचि के हिसाब से अपने टैलेंट को दिखा सकते हैं। उदाहरण के लिए, अगर किसी बच्चे को डांस में रुचि है, तो वह उसका वीडियो बनाकर अपलोड कर सकता है। इससे उसके प्रतिभा को एक नया मंच मिल सकता है।

यहां जानिए, बच्चों पर सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों के बारे में।

बच्चों के लिए सोशल मीडिया के नुकसान | 12 Negative Effect Of Social Media On Children In Hindi

अगर बच्चों को सोशल मीडिया के भरोसे छोड़ दिया जाए, तो इसके कुछ नकारात्मक प्रभाव भी सामने आ सकते हैं, जिसकी चर्चा हम नीचे क्रमवार तरीके से कर रहे हैं ((3)(4) :

1.मानसिक स्वास्थ्य पर असर :

सोशल मीडिया का अधिक उपयोग बच्चों की मानसिक स्थिति पर बुरा प्रभाव डाल सकता है। इस पर हुए एक शोध से जानकारी मिलती है कि स्मार्टफोन के अधिक उपयोग से बच्चों में मानसिक परेशानी की भी बढ़ोतरी हो सकती है। उनके संज्ञानात्मक (cognitive) नियंत्रण पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

2.नींद की कमी में योगदान :

सोशल मीडिया के अधिक उपयोग से बच्चों की नींद में भी कमी देखी गई है। दरअसल, जो बच्चे देर रात कर सोशल मीडिया का प्रयोग करते हैं, वो और देरी से सोते हैं और फिर सुबह उन्हें स्कूल जाने के लिए जल्दी उठना पड़ता है, इससे उनकी नींद पूरी नहीं हो पाती है।

3.अवसाद का कारण :

सोशल मीडिया बच्चों में अवसाद का भी कारण बन सकता है। इस बात की पुष्टि एक शोध में होती है। बताया जाता है कि जो बच्चे रात में अधिक समय तक फोन का इस्तेमाल करते हैं, उनकी नींद प्रभावित होती है और वो अवसाद का शिकार हो सकते हैं।

4.चिंता का कारण :

एनसीबीआई (National Center for Biotechnology Information) की वेबसाइट पर प्रकाशित शोध के मुताबिक, सोशल मीडिया का अधिक उपयोग बच्चों में चिंता का भी कारण बन सकता है। जैसा कि हमने लेख में बताया कि सोशल मीडिया का अधिक उपयोग बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। इसके परिणामस्वरूप सोशल मीडिया बच्चों में चिंता की समस्या भी उत्पन्न कर सकता है।

5.पढ़ाई-लिखाई पर प्रभाव :

सोशल मीडिया के नकारात्मक प्रभाव में उनकी पढ़ाई-लिखाई भी शामिल है। इस बारे में शोध बताते हैं कि स्मार्टफोन के अधिक उपयोग से बच्चों की सामाजिक कार्य प्रणाली के साथ-साथ स्कूली परफॉर्मेंस भी प्रभावित हो सकती है।

6.साइबर बुलिंग :

सोशल मीडिया के नकारात्मक प्रभावों में साइबर बुलिंग भी शामिल है। साइबर बुलिंग यानी इंटरनेट माध्यमों से किसी को तंग करना या उसका मजाक उड़ाना या उसे नीचा दिखाना। बता दें कि साइबर बुलिंग आत्महत्या को भी बढ़ावा दे सकता है।

7.तनाव की समस्या :

सोशल मीडिया के प्रभावों पर हुए अध्ययन के मुताबिक, फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्म का लंबे समय तक उपयोग तनाव को बढ़ाने का काम कर सकता है।

8.इंटरनेट की लत :

बच्चे अगर अपना अधिकांश समय सोशल मीडिया पर बिताते हैं, तो इससे उन्हें इसकी लत भी लग सकती है। इसका नकारात्मक असर बच्चों की दिनचर्या पर पड़ सकता है। इससे बच्चे पूरा समय फोन के साथ ही बिता सकते हैं। इस कारण समय पर खाना खाने की आदत प्रभावित हो सकती है। साथ ही उनकी नींद का समय भी बिगड़ सकता है। इस वजह से उनकी सेहत भी खराब हो सकती है।

9.परिजनों से दूरी :

सोशल मीडिया का अधिक उपयोग बच्चों और माता-पिता के बीच में दूरी बढ़ा सकता है। इससे घर में मां-पापा के होते हुए भी बच्चे फोन के साथ अपना ज्यादा समय गुजार देंगे, जिससे पारिवारिक दूरी बढ़ सकती है।

10.समय की बर्बादी :

इसमें तो कोई दो राय नहीं कि सोशल मीडिया का अधिक उपयोग समय की बर्बादी है। खासकर बच्चों के लिए। दरअसल, एक बार जब बच्चों को इसकी आदत लग जाएगी, तो अपना सारा दिन इसी में गुजार देंगे और समय का सदुपयोग नहीं करेंगे।

11.हिंसक प्रवृत्ति में बढ़ोतरी :

सोशल मीडिया बच्चों में हिंसा को भी बढ़ावा दे सकता है। अगर बच्चे फेसबुक या फिर यूट्यूब पर हिंसक चीजें देखेंगे, तो उनके अंदर भी वैसी आदतों का विकास हो सकता है। इससे वो घर में भी अपने परिवार वालों के साथ वैसा ही व्यवहार कर सकते हैं।

12.एकाग्रता में कमी :

एक बार भी अगर बच्चों को सोशल मीडिया की आदत लग गई, तो इसका असर उनकी एकाग्रता पर भी पड़ सकता है। उदाहरण के तौर पर, अगर बच्चा होमवर्क करने बैठता है और उसके आस-पास फोन रखा है, तो बार-बार फोन चलाने के बारे में ही सोचेगा और बच्चे का मन पढ़ाई में नहीं लगेगा।

इसके अलावा, अगर माता-पिता उसे छोटी-छोटी चीजों की पढ़ाई के लिए भी फोन का इस्तेमाल करने के लिए छोड़ देते हैं, तो वैसे में वह अपनी बुद्धि का इस्तेमाल करना छोड़ देता और पूर तरह फोन पर निर्भर हो जाएगा।

अंत में जानें, बच्चों को सोशल मीडिया की अच्छी-बुरी चीजों के प्रति जागरूक करने के उपाय।

माता पिता अपने बच्चों को सोशल मीडिया की अच्छी-बुरी चीजों के प्रति कैसे जागरूक करें?

बच्चों में सोशल मीडिया के सही उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए और इसके नकारात्मक प्रभावों को सीमित करने के लिए माता-पिता को कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। जो कुछ इस प्रकार हैं :

1.समय सीमा निर्धारित करें : सोशल मीडिया पर समय बिताने के लिए बच्चों की समय सीमा को निर्धारित करें। साथ उन्हें सोशल मीडिया का उपयोग करने के लिए ऐसा समय दें, जिससे उनकी पढ़ाई, नींद, भोजन जैसी जरूरी चीजें बाधित न हो।

2.सोशल अकाउंट्स की निगरानी करें : अगर बड़े बच्चे का फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर अकाउंट्स हैं, तो नियमित रूप से उन अकाउंट्स को चेक करते रहें। माता पिता चाहें, तो सप्ताह में एक बार ऐसा कर सकते हैं। इससे बच्चों की गतिविधियों पर नजर बनी रहेगी। वहीं, छोटे बच्चों को सोशल मीडिया अकाउंट्स बनाने की अनुमति न दें।

3.बच्चों को बताएं क्या गलत है : सोशल मीडिया पर सही और गलत दोनों तरह की चीजों का प्रसार होता है। ऐसे में इसके उपयोग से पहले बच्चों को पता होना चाहिए कि सही और गलत में क्या अंतर है। खासकर गलत आदतों के बारे उन्हें जानकारी होनी चाहिए। इसलिए, सोशल मीडिया की गलत आदतों के बारे में बच्चों को जरूर बताएं ताकि वह इसे दूरी बनाकर रखें।

4.दोस्तों के साथ आमने-सामने की बातचीत के लिए प्रोत्साहित करें : दोस्तों से बात करने के लिए सोशल मीडिया की जगह बच्चों को प्रोत्साहित करें कि वह उनके पास जाएं और बातें करें। इससे उनकी दोस्ती भी बढ़ेगी और सोशल मीडिया की लत भी नहीं लगेगी।

5.बच्चों से सोशल मीडिया के बारे में खुल कर बात करें : बच्चों के स्मार्टफोन देने से पहले उनसे सोशल मीडिया के बारे में खुल कर बात करें। वहीं, अगर बच्चा पहले से इसका उपयोग कर रहा है, तो उससे पूछें कि वह सोशल मीडिया का इस्तेमाल कैसे कर रहा है।

तो दोस्तों ये थे बच्चों पर सोशल मीडिया के कुछ सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव। हमारा यह लेख बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखने या फिर बच्चों को सोशल मीडिया के भरोसे छोड़ने वाले दोनों तरह के माता-पिता के लिए है। जैसा कि हमने लेख में बताया कि सोशल मीडिया के फायदे और नुकसान दोनों है। इसलिए, जरूरी है कि बच्चों तक इसकी पहुंच को सीमित रखा जाए। इसके लिए लेख में हमने कुछ टिप्स भी बताएं हैं, जिसके जरिए माता-पिता बच्चों को जागरूक कर सकते हैं। हम उम्मीद करते हैं कि हमारा यह लेख आपके लिए लाभकारी सिद्ध होगा।

संदर्भ (References) :