ग्रहण और गर्भवती - गर्भावस्था में सूर्य और चंद्र ग्रहण का प्रभाव

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सूर्य और चंद्र ग्रहण को लेकर भारत में कई पौराणिक मान्यताएं हैं। अमूमन जब ग्रहण लगता है, तो लोग पूजा-पाठ करते हैं और धार्मिक स्थलों को निश्चित समय के लिए बंद कर दिया जाता है। वहीं, मान्यता यह भी है कि गर्भवती महिला और होने वाले शिशु के लिए ग्रहण शुभ नहीं होता। कहा जाता है कि शिशु को शारीरिक रूप से किसी न किसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए, गर्भावस्था के दौरान महिला को ग्रहण के समय कई नियमों का पालन करने की सलाह दी जाती।

अभी तक ग्रहण से गर्भवती व शिशु को होने वाले नुकसान का वैज्ञानिक प्रमाण सामने नहीं आया है। मॉमजंक्शन के इस लेख में हम ग्रहण के बारे में ही बात करेंगे। जानेंगे कि क्या वाकई में ग्रहण का गर्भावस्था पर बुरा असर पड़ता है या यह सिर्फ अंधविश्वास है। यहां हम स्पष्ट कर दें कि मॉमजंक्शन ग्रहण से जुड़े किसी भी अंधविश्वास की न तो पुष्टि करता है और न ही उस पर विश्वास करता है।

सबसे पहले तो यह जानना ज़रूरी है कि ग्रहण क्या है और यह कितने प्रकार का होता है।

ग्रहण क्या है और कितने प्रकार का होता है?

ग्रहण एक खगोलीय अवस्था है, जिसमें कोई ग्रह या उपग्रह प्रकाश स्रोत यानी सूरज और पृथ्वी के बीच आ जाता है। इस अवस्था में कुछ देर के लिए रोशनी कम हो जाती है या अंधेरा छा जाता है। इसे ही ग्रहण कहते हैं (1)

आपको बता दें कि ग्रहण दो प्रकार के होते हैं- चंद्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण।

चंद्र ग्रहण : जब सूरज और पृथ्वी के बीच से चंद्रमा गुजरता है, तो उस अवस्था को चंद्र ग्रहण कहते हैं। ऐसी स्थिति में चांद, पृथ्वी की छाया से होकर गुजरता है। चंद्र ग्रहण सिर्फ पूर्णिमा के दिन ही लगता है।

सूर्य ग्रहण : वहीं सूर्य ग्रहण तब होता है जब चांद, पृथ्वी और सूरज एक ही रेखा में आ जाते हैं। इसमें चांद की छाया पृथ्वी पर पड़ती है। ऐसा पूर्णिमा या फिर अमावस्या के दिन ही होता है।

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गर्भावस्था के दौरान ग्रहण – क्या यह वास्तव में बुरा है?

बेशक, अभी तक वैज्ञानिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं हुई है कि ग्रहण का गर्भावस्था पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है, लेकिन पौराणिक मान्यताएं इसमें विश्वास रखती हैं। ये मान्यताएं भारतीय संस्कृति में इतनी प्रचलित हो चुकी हैं कि लोग इससे संबंधित किसी भी तरह का जोखिम नहीं उठाना चाहते और आज भी इसका पालन कर रहे हैं। कई तो बिना कारण जाने ही इससे संबंधित नियम मानते हैं। ऐसा सिर्फ भारत में ही नहीं है, बल्कि अन्य देशों में इस दौरान सतर्कता बरतने की सलाह दी जाती है।

इन मान्यताओं के अनुसार, गर्भवती महिला को ग्रहण के दौरान घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए, इससे शिशु पर बुरा असर पड़ सकता है। हालांकि, यह सिर्फ पूरी तरह से मान्यताओं पर ही निर्भर करता है कि गर्भावस्था में ग्रहण हानिकारक होता है या नहीं।

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ग्रहण गर्भवती महिलाओं के लिए हानिकारक है : मिथक या सच्चाई?

आपने अक्सर बड़े-बुज़ुर्गों से ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को कुछ एहतियात बरतने के बारे में सुना होगा। आज यहां ग्रहण से संबंधित बातों पर नज़र डालेंगे और जानेंगे कि क्या ये बातें मिथक हैं या सच्चाई :

गर्भावस्था में सूरज की ओर नहीं देखना चाहिए और बाहर नहीं निकलना चाहिए?

हां, यह सच है कि ग्रहण के दौरान प्रत्यक्ष रूप से सूरज की ओर नहीं देखना चाहिए और घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए, लेकिन यह नियम सिर्फ गर्भवती महिला के लिए नहीं, बल्कि हर व्यक्ति के लिए है। इसके पीछे के कारण हम नीचे बात रहे हैं :

  • सबसे पहली बात तो यह है कि ग्रहण लगा हो या नहीं, लेकिन सूरज की तरफ प्रत्यक्ष रूप से देखने से आंखों पर बुरा असर पड़ सकता है।
  • ग्रहण के दौरान नग्न आंखों से सूरज की ओर देखने से रेटिना पर बुरा प्रभाव पड़ता है, जिससे दृष्टि को नुकसान पहुंच सकता है। सूर्य ग्रहण को देखने के लिए विशेष उपकरण आते हैं।
  • इसलिए, चाहे गर्भवती महिला हो या कोई अन्य व्यक्ति, ग्रहण के दौरान नग्न आंखों से सूरज की ओर नहीं देखना चाहिए। ऐसा करने से आपकी आंखें खराब हो सकती है, जिसे अंग्रेज़ी में ‘एक्लिप्स ब्लाइंडनेस’ कहा जाता है।

ग्रहण के समय खाना बनाना और खाना नहीं चाहिए?

आपने विभिन्न घर-परिवारों में या फिर रिश्तेदारों से ग्रहण के बारे में कई तरह की बातें सुनी होंगी। इनमें से एक यह भी है कि ग्रहण के दौरान न तो खाना पकाना चाहिए और न ही खाना चाहिए। कुछ लोग इसे धार्मिक मान्यता मानते हैं, लेकिन यह शायद ही कोई जानता हो कि इसके पीछे भी वैज्ञानिक आधार है। आइए, जानते हैं वैज्ञानिक कारण :

यह सभी जानते हैं कि सूरज की किरणें हमारे लिए कितनी ज़रूरी हैं। सूरज की रोशनी और किरणों के बिना पृथ्वी पर सूक्ष्म जीव और रोगाणुओं की संख्या बढ़ सकती है और ऐसा सूर्य ग्रहण लगने पर होता है। ग्रहण के दौरान जैसे ही सूर्य के आगे अवरोध आता है, वैसे ही उसकी किरणें पृथ्वी तक पहुंचनी बंद हो जाती हैं।

यही कारण है कि ग्रहण के दौरान तापमान तेजी से गिर जाता है। तापमान गिरने से और सूरज की किरणें न पहुंचने से रोगाणुओं की संख्या बढ़ जाती है, जिस वजह से इस दौरान भोजन पर इन सूक्ष्म जीवों का प्रभाव पड़ सकता है, जो सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है। यही कारण है कि ग्रहण के समय खाना खाने और बनाने के लिए मना किया जाता है।

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गर्भवती महिलाओं पर चंद्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण का प्रभाव

ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को खास सतर्कता बरतने की सलाह दी जाती है। इसमें ऐसी कई मान्यताएं हैं, जिन पर लोग भरोसा करते हैं। नीचे हम बता रहे हैं चंद्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण के उन प्रभावों के बारे में, जिन पर लोग भरोसा करते हैं, लेकिन इनका कोई भी वैज्ञानिक आधार नहीं है। जानिए, इन मान्यताओं के अनुसार गर्भवती महिलाओं पर चंद्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण के क्या प्रभाव पड़ सकते हैं :

  • ऐसा माना जाता है कि ग्रहण के दौरान चाकू या कैंची का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। माना जाता है कि ऐसा करने से गर्भ में पल रहे शिशु पर प्रभाव पड़ता है। इससे शिशु में फांक होंठ (क्लैफ्ट लिप) जैसी शारीरिक विकृतियां या अन्य बदसूरत जन्मचिह्न उत्पन्न हो सकते हैं।
  • यह भी अंधविश्वास है कि ग्रहण के समय सूई का इस्तेमाल करने से शिशु के दिल में छेद हो जाता है। ग्रहण के दौरान सूई या नुकीली चीज़ का संबंध शिशु के स्वास्थ से नहीं होता।
  • ग्रहण के समय गर्भवती महिला के पानी पीने से शिशु की त्वचा सूखने लगती है और गर्भवती को डीहाइड्रेशन होने लगता है। यह पूरी तरह से गलत है।
  • ऐसा कहा जाता है कि चंद्र ग्रहण के बाद गर्भवती को नहाना चाहिए, वरना शिशु को बीमारी लग सकती है, लेकिन ऐसा कुछ नहीं है।

नोट : बेशक इन सावधानियों के पीछे कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है, लेकिन इन बातों को लेकर विज्ञान की अपनी परिभाषा है, जिसे हमने इस लेख के अगले अंश में बताया है।

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गर्भवती होने पर चंद्र ग्रहण/सूर्य ग्रहण के दौरान क्या-क्या सावधानियां बरतनी चाहिएं?

गर्भावस्था के दौरान सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण दोनों के ही नकारात्मक प्रभाव माने जाते हैं। यहां जानिए कि चंद्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण के दौरान गर्भवती को क्या-क्या सावधानियां बरतनी चाहिएं :

चाकू व कैंची का इस्तेमाल न करें : सूर्य ग्रहण के दौरान अंधकार छा जाता है। ऐसे में चाकू या कैंची का इस्तेमाल करने से हाथ में चोट लगने का खतरा रहता है। यही कारण है कि गर्भवती को ग्रहण के दौरान सब्जी काटने से मना किया जाता है। इसके अलावा, ऐसी कोई भी नुकीली चीज़ का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, जिससे चोट लगने का डर हो।

गर्भावस्था में ग्रहण के दौरान सूई का इस्तेमाल न करें : जैसा कि हमने बताया कि सूर्य ग्रहण के समय अंधकार होने लगता है और अंधेरे समय में अगर आप सूई में धागा डालेंगी, तो आंखों पर जोर पड़ेगा। इससे आंखों को नुकसान पहुंच सकता है।

ग्रहण के दौरान पानी न पिएं : ग्रहण के समय ढेरों संख्या में जीवाणु पैदा होते हैं। इन जीवाणुओं से पानी दूषित हो सकता है, जो गर्भवती को नुकसान पहुंचा सकता है। यही कारण है कि ग्रहण के दौरान गर्भवती को पानी पीने से मना किया जाता है। सिर्फ पानी ही नहीं, ग्रहण के समय पर गर्भवती को कुछ न खाने की भी सलाह दी जाती है। हालांकि, कहा जाता है कि अगर इस दौरान पीने के पानी में तुलसी का पत्ता डाल दिया जाए, तो वह दूषित नहीं होता। इसका कारण यह है कि तुलसी में एंटीऑक्सीडेंट तत्व होते हैं, जो हानिकारक बैक्टीरिया को मारने में सक्षम होते हैं (2)

ग्रहण के बाद स्नान : ग्रहण के बाद गर्भवती महिला को नहाने की सलाह दी जाती है। इसके पीछे वैज्ञानिक तर्क यह है कि ग्रहण में लाखों की तादात में जीवाणु पैदा होते और मरते हैं, इसलिए ग्रहण के बाद साफ-सफाई के मकसद नहाने की सलाह दी जाती है।

ग्रहण के दौरान मंत्रों का जाप करें : ग्रहण के दौरान गर्भवती महिला को मंत्रों का जाप करने की सलाह दी जाती है, इसके पीछे भी वैज्ञानिक कारण है। दरअसल, मंत्रों के उच्चारण से ऊर्जावान तरंगें पैदा होती हैं, जिससे आसपास के माहौल में सकारात्मकता का प्रवाह होता है।

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हम उम्मीद करते हैं कि गर्भावस्था के दौरान ग्रहण के प्रभावों से संबंधित जवाब आपको मिल गए होंगे। बेशक, वर्षों से पौराणिक मान्यताआें के अनुसार इनका पालन किया जा रहा है, लेकिन वैज्ञानिक पुष्टि के बिना इनका पालन करना निराधार है। इस लेख के जरिए, हमने कुछ वैज्ञानिक तर्क रखने का भी प्रयास किया है, जिनका पालन प्रत्येक गर्भवती महिला को करना चाहिए। नीचे कमेंट बॉक्स में आप हमारे साथ ग्रहण के दौरान अपने गर्भावस्था अनुभव शेयर कर सकती हैं।

संदर्भ (References) :

 

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