बच्चों की मालिश के लिए जैतून तेल (Jaitun Tel) | Olive Oil Benefits For Baby Massage In Hindi

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बच्चे, बड़े और बुजुर्ग, सभी को शरीर की मसाज करना पसंद होता है। खासकर, शिशु के शरीर की मसाज को तो मेडिकली भी काफी महत्व दिया जाता है। ऐसा माना जाता है कि शिशु की मसाज का यह सिलसिला लगभग दूसरी शताब्दी ई.पू के आसपास चीन में शुरू हुआ था (1)। बस तभी से शिशु की मसाज के लिए कई प्रकार के तेल का उपयोग किया जा रहा है, जैसे – नारियल व बादाम का तेल आदि। इस लिस्ट में जैतून का तेल भी शामिल है। मॉमजंक्शन के इस लेख में हम जैतून के तेल से बच्चों की मालिश के बारे में बात करेंगे। साथ ही आप यह भी जानेंगे कि शिशु के शरीर की मसाज किस तरह की जाती है।

आइए, सबसे पहले यह जानिए कि शिशु की मालिश करने के लिए जैतून का तेल सुरक्षित है या नहीं।

क्या शिशु की मालिश के लिए जैतून के तेल का उपयोग करना सुरक्षित है? | Bachon Ke Liye Jaitun Oil

जी हां, विभिन्न मामलों में शिशु की मालिश के लिए जैतून के तेल का उपयोग करना सुरक्षित है। शिशु के शरीर पर जैतून के तेल का उपयोग करने के कई फायदे हो सकते हैं, हालांकि, कुछ मामलों में जैतून के तेल से मालिश करने से शिशु को कुछ समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इस बारे में लेख में आगे विस्तार से बताया गया है।

आगे जानिए कि बच्चों की जैतून के तेल से मसाज के फायदे।

बच्चों के लिए जैतून के तेल से मालिश के फायदे

शिशु की मालिश के लिए जैतून के तेल का उपयोग करने के फायदे कुछ इस प्रकार हैं:

  • वजन बढ़ाए : अगर शिशु का जन्म समय से पहले हुआ है और उसका वजन कम है, तो जैतून के तेल से मसाज करने से उसका वजन बढ़ाने में मदद मिल सकती हैं (2)
  • त्वचा को मुलायम बनाए : अगर शिशु की त्वचा रूखी है, तो शुद्ध वर्जिन ऑर्गेनिक जैतून के तेल से मसाज करने से उसकी त्वचा को मुलायम बनाया जा सकता है (3)
  • क्रेडेल कैप से राहत : अगर शिशु के सिर पर तैलीय, पीले रैशेज (Cradel cap) हैं, तो शैम्पू करने से पहले उसके सिर पर थोड़ा-सा जैतून का तेल लगाने से रैशेज को कम किया जा सकता है (4)
  • रक्त संचार बेहतर करे : मसाज करने से बच्चों में रक्त संचार बेहतर होगा और उनके विकास में मदद मिल सकती है (5)। फिर चाहे आप इसके लिए जैतून का तेल का इस्तेमाल करें या कोई अन्य तेल।
  • बेहतर नींद में मदद करे : अगर बच्चों की अच्छी तरह से मसाज की जाए, तो इससे उन्हें रिलैक्स मिलता है और वो बेहतर नींद ले सकते हैं। इसके लिए आप हल्का गुनगुना जैतून का तेल इस्तेमाल करें (6)
  • मानसिक विकास : जैतून का तेल उनकी मानसिक क्षमता और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (neurodevelopment) के विकास में मदद करता है (7)
  • जुकाम-खांसी से आराम : अगर शिशु को जुकाम और खांसी हो रही हो, तो उसके शरीर पर मसाज करने से जुकाम और खांसी में भी राहत मिल सकती है (8)

यह जानने के बाद कि बच्चों की मालिश के लिए जैतून का तेल कैसा है, आइए अब आपको बता दें कि शिशु की मसाज किस तरह की जानी चाहिए।

जैतून के तेल से अपने शिशु की मालिश कैसे करें?

जैतून के तेल से अपने शिशु की मसाज आप नीचे बताए गए तरीके से कर सकते हैं:

  • सबसे पहले वर्जिन जैतून के तेल में बराबर मात्रा में गुनगुना पानी मिला लें। शिशु की त्वचा संवेदनशील होती है और शुद्ध ओलिव ऑयल का उपयोग करने से उस पर रैशेज पड़ सकते हैं।
  • थोड़ा-सा जैतून का तेल अपनी हथेलियों में ले कर, शिशु के सीने से मसाज की शुरुआत करें।
  • सीने से होते हुए शिशु के कंधों और हाथों की मालिश करें।
  • इसी प्रकार शिशु की पीठ पर भी मालिश करें।
  • आखिरी में बच्चे में पैरों और तलवों की मसाज करें।
  • लगभग 15-20 मिनट मसाज करने के बाद शिशु को कुछ देर खेलने दें और फिर उसे हल्के गुनगुने पानी से नहला दें या साफ कर दें।

लेख के आने वाले भागों में जानिए शिशु के लिए जैतून के तेल का उपयोग करने से जुड़े कुछ और सवालों के जवाब।

क्या जैतून का तेल शिशु का रंग साफ करने में मदद करता है?

शिशु का रंग पूरी तरह उनकी जींस (genes) पर निर्भर करता है (9)। जैतून के तेल से मसाज करना शिशु का रंग साफ करने का उपाय हो सकता है या नहीं, इस पर कोई शोध उपलब्ध नहीं हैं।

क्या आप बच्चे के नाक और कान में जैतून के तेल का उपयोग कर सकते हैं?

कई पुरानी मान्यताओं के अनुसार, बच्चों के कान, नाक और नाभि में तेल डालने के सुझाव दिए जाते हैं, लेकिन इन पर कोई वैज्ञानिक शोध उपलब्ध नहीं है। ऐसा करना शिशु में संक्रमण का कारण बन सकता है। इसलिए, शिशु के किसी भी अंग में तेल डालने से बचना चाहिए।

जैतून के तेल से बच्चों की मालिश करने के फायदे जानने के बाद, यह भी जानना जरूरी है कि इस दौरान किस तरह की सावधानियां बरतनी चाहिए। इस बारे में जानिए लेख के अगले भाग में।

बेबी मसाज के लिए ऑलिव ऑयल का इस्तेमाल करते समय बरती जाने वाली सावधानियां

जब भी आप जैतून के तेल से अपने शिशु की मसाज करें, तो नीचे बताई गई बातों का ध्यान रखें :

  • शोध में पाया गया है कि जैतून के तेल से मसाज करने से शिशु को एटॉपिक डर्मेटाइटिस (त्वचा पर लाल और खुजलीदार चकत्ते होना) हो सकता है। इसलिए, अगर आपके शिशु की त्वचा रूखी है, तो बिना डॉक्टर से परामर्श किये जैतून के तेल का उपयोग करने से बचें (10)
  • शिशु के शरीर पर मसाज करने समय हाथों को नर्म रखें। ज्यादा रगड़ कर मसाज करने से शिशु की त्वचा पर रैशेज और दाने हो सकते हैं।
  • मसाज करते समय हाथों को बच्चे के शरीर पर नीचे से ऊपर की ओर ले जाएं। इसका उल्टा करने से बच्चे की त्वचा ढीली हो सकती हैं।
  • पैरों पर मसाज करते समय हाथों को ऊपर से नीचे की ओर ले जाएं।
  • पीठ पर मसाज करते समय ज्यादा दबाव डालने से रीढ़ की हड्डी टूट सकती है।

शिशु का शरीर नाजुक और त्वचा संवेदनशील होती है, इसलिए उसकी ठीक से देखभाल करना बहुत जरूरी है। बच्चों की मसाज करने में दादी और नानी माहिर होती हैं, इसलिए अगर संभव हो, तो अपने शिशु की मसाज किसी बुजुर्ग महिला से करवाएं। इससे उन्हें शारीरिक विकास के साथ-साथ दादी-नानी के साथ अधिक समय बिताने का मौका भी मिलेगा। वहीं, अगर आप अपने शिशु की मसाज स्वयं कर रही हैं, तो लेख में बताई गई बातों को ध्यान में रखें। अगर जैतून के तेल से मसाज करने से शिशु के शरीर पर किसी भी प्रकार के रैशेज या दाने होते हैं, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श करें। इसके अलावा, अगर आपके मन में इस लेख से जुड़ा कोई और सवाल है, तो आप नीचे दिए गये कमेंट बॉक्स के जरिए हमसे पूछ सकते हैं।

संदर्भ (References) :

5. Massage by BetterHealth Channel
6. Sleep and your baby by BetterHealth Channel
9. Is eye color determined by genetics by U.S. National Library of Medicine