बच्चों की याददाश्त (स्मरण शक्ति) बढ़ाने के 20 उपाय | Increase Memory Power in Hindi

Increase Memory Power in Hindi

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कहते हैं कि बच्चे भगवान की देन होते हैं, जिनके अलग-अलग रूप होते हैं। कोई चंचल होता है, तो कोई शांत। कोई तेज होता है, तो कोई कमजोर। हालांकि, चंचलता एक बार के लिए ठीक भी लग सकती है, लेकिन अगर बच्चे की याददाश्त कमजोर हो, तो इसका सीधा असर उनके स्कूल के प्रदर्शन पर पड़ सकता है, जो उनके भविष्य के लिए सही नहीं है। इसलिए, जरूरी है कि बचपन से ही बच्चों की याददाश्त बढ़ाने पर ध्यान दिया जाए। यही वजह है कि मॉमजंक्शन के इस लेख में हम बच्चों की स्मरण शक्ति बढ़ाने के उपाय लेकर आए हैं। यहां हम ऐसे 20 तरीकों को बताने वाले हैं, जो बच्चों की मेमोरी बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।

चलिए, सीधे नजर डालते हैं याददाश्त बढ़ाने के उपायों के बारे में।

बच्चों की याददाश्त (स्मरण शक्ति) बढ़ाने के 20 उपाय | How To Increase Memory Power In Hindi

यहां हम क्रमवार तरीके से उन 20 उपायों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो बच्चों की स्मरण शक्ति बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। यहां कुछ शोध पर आधारित उपाय हैं, जबकि यहां कुछ ऐसे भी उपायों को शामिल किया गया है, जिन पर सटीक शोध उपलब्ध नहीं है, लेकिन ये कुछ हद तक याददाश्त को सुधारने में मददगार हो सकते हैं। अब पढ़ें आगे :

1. चित्रों का सहारा लें : स्मरण शक्ति को बढ़ाने के लिए चित्रों का सहारा लेना भी एक अच्छा विकल्प साबित हो सकता है। इसके लिए माता-पिता बच्चों से उन चित्रों को बनाने के लिए कह सकते हैं, जिनके बारे में उन्होंने पढ़ा हो। उदाहरण के तौर पर, अगर बच्चे ने अल्फाबेट्स की पढ़ाई की है (जैसे – ए फॉर एप्पल आदि), तो बच्चों से कहें कि वो उसका चित्र बनाकर दिखाएं। इससे उनकी याद करने की क्षमता में सुधार हो सकता है। वहीं, विषय से जुड़े एक शोध में इस बात का जिक्र मिलता है कि चित्रों के जरिए चीजों को याद करने में मदद मिल सकती है (1)

2. मानसिक कल्पना का सहारा लें : बच्चों की मेमोरी को बढ़ाने के लिए मानसिक कल्पना का भी सहारा लिया जा सकता है। इस बारे में एक शोध से भी जानकारी मिलती है, जिसमें बताया गया है कि बच्चों की मेमोरी को बढ़ाने के लिए शिक्षक मानसिक कल्पना का सहारा ले सकते हैं। जिसमें वह बच्चों को पढ़ाई गई चीजों की कल्पना करने के लिए कहते हैं जिससे बच्चों की याददाश्त में बढ़ोतरी हो सकती है। उदाहरण के लिए, अगर बच्चों को इतिहास पढ़ाया जा रहा है, तो उन्हें उससे ही जुड़ी किसी घटना (जैसे युद्ध का मैदान) की कल्पना करने के लिए कहें (2)। इससे उन्हें चीजों को समझने और याद करने में आसानी हो सकती है।

3. शब्दों से वाक्य बनवाएं : एलैबोरेशन यानी किसी चीज को विस्तार करना भी बच्चों की स्मृति बढ़ाने में सहायक हो सकता है। इसके लिए माता पिता बच्चों को एक शब्द दे सकते हैं और फिर उन्हें उससे एक पूरा वाक्य बनाने के लिए कह सकते हैं। उदाहरण के लिए, मान लीजिए बच्चों को एक शब्द दिया गया ‘आम’। अब बच्चों से कहें कि वो इससे एक पूरा वाक्य बनाए, जैसे – ‘राम आम खाता है।’ इससे बच्चे अपने दिमाग पर जोर डालेंगे, जिससे उनके सोचने की क्षमता बढ़ सकती है (2)। यह प्रक्रिया याददाश्त को बढ़ाने के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।

4. पर्याप्त नींद दिलाएं : एनसीबीआई (National Center for Biotechnology Information) की वेबसाइट पर प्रकाशित एक शोध से जानकारी मिलती है कि बेहतर नींद स्मृति को बढ़ावा देने में मददगार साबित हो सकती है। दरअसल, बच्चों में नींद का असर उनके संज्ञानात्मक प्रदर्शन (cognitive performance) पर पड़ सकता है। अगर उनकी नींद सही से पूरी नहीं होती है, तो इस कारण वह खराब संज्ञानात्मक प्रदर्शन (याद करने, सोचने, समझने व ध्यान देने) कर सकते हैं (3)। यही वजह है कि बच्चों की मेमोरी को बढ़ाने के लिए उन्हें समय से सोने के साथ-साथ पर्याप्त नींद (8 से 10 घंटे) की भी आवश्यकता होती है।

5. कहानी और कविताओं की मदद लें : कहते हैं कि बच्चों को कहानी और कविताओं में अधिक रुचि होती है। इस आधार पर उनकी स्मृति को बढ़ाने के लिए कविताओं और कहानियों की मदद लेना लाभकारी हो सकता है। इस प्रक्रिया को बेहद आसान भी माना जाता है। इसके लिए माता-पिता बच्चों को कोई प्रेरणादायक कहानी सुना सकते हैं और फिर उनसे उसी कहानी को सुनाने के लिए कहें।

इसके अलावा, कविताओं की भी मदद ली जा सकती है। बच्चों को ऐसी कविताएं पढ़ाएं जिसमें राइमिंग हो और वह हल्की हों, फिर उन्हें उसी कविता को सुनाने के लिए कहें। इसकी जगह चाहें, तो किसी गाने की भी मदद ले सकते हैं (4)

6. जरूरी पोषक तत्व : बच्चों की स्मरण शक्ति बढ़ाने के लिए उन्हें पौष्टिक आहार देना भी जरूरी है। इससे उनके मस्तिष्क के स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर पड़ता है। इस बात की पुष्टि एक शोध में होती है। जिसमें बताया गया है कि मस्तिष्क को लगातार अमीनो एसिड की आवश्यकता होती है, ताकि वह न्यूरोट्रांसमीटर (खासकर सेरोटोनिन और कैटेकोलेमिन्स) का निर्माण कर सके। इस क्रम में अगर सेरोटोनिन की कमी होती है, तो इससे सीखने की क्षमता और स्मृति कमजोर हो सकती है।

इसलिए, जरूरी है कि पौष्टिक आहार का सेवन किया जाए। इसके लिए बच्चों के भोजन में विटामिन-डी, विटामिन बी 1, बी 6, बी 12, फोलिक एसिड, कोलीन, आयरन और आयोडीन को शामिल किया जा सकता है। इसके अलावा, एंटीऑक्सीडेंट (जैसे-विटामिन सी, ई, ए, जिंक, सेलेनियम, ल्यूटिन और जेक्सैंथिन) भी ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाकर संज्ञानात्मक सुधार कर सकते हैं (5)

7. ड्राई फ्रूट्स का सेवन : बच्चों की मेमोरी को बढ़ाने के लिए उन्हें ड्राई फ्रूट्स खिलाना भी फायदेमंद हो सकता है। वहीं, अगर बच्चा एक साल से छोटा है, तो उन्हें ड्राई फ्रूट्स का सेवन न कराएं। सीडीसी (Centers for Disease Control and Prevention) के मुताबिक, 12 महीने की उम्र तक के बच्चों में साबुत खाद्य पदार्थों से चोकिंग (गले में अटकने का खतरा) का खतरा बना रहता है(6)। वहीं, 6 महीने तक बच्चे को सिर्फ मां के दूध का सेवन कराया जाता है (7)। यहां हम कुछ सूखे मेवे के बारे में बता रहे हैं, जो एक साल के अधिक उम्र के बच्चों की स्मृति को बढ़ाने में कारगर साबित हो सकते हैं।

(i) अखरोट : अखरोट का सेवन बेहतर संज्ञानात्मक प्रदर्शन और स्मृति में सुधार करने में लाभकारी साबित हो सकता है (8)

(ii) बादाम : बताया जाता है कि बादाम में स्मृति को बढ़ाने वाले गुण होते हैं (9)। ऐसे में इसका सेवन बच्चों की स्मरण शक्ति को बढ़ाने में मददगार साबित हो सकता है।

(iii) किशमिश : नियमित रूप से किशमिश का सेवन भी बच्चों की मेमोरी को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है (10)

8. घी का सेवन है मददगार : बच्चों को घी का सेवन कराना भी उनकी स्मृति को बढ़ाने में सहायक हो सकता है। एनसीबीआई की वेबसाइट पर मौजूद एक रिसर्च के मुताबिक, घी स्मृति में सुधार करने के साथ-साथ मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र को मजबूत कर सकता है (11)। इस आधार पर माता पिता अपने बच्चे के आहार में घी को शामिल कर उनकी स्मरण शक्ति को बढ़ा सकते हैं।

9. उन्हें सवाल पूछने के लिए कहें : बच्चों की याददाश्त को मजबूत बनाने के लिए उनके द्वारा सवाल पूछा जाना भी जरूरी माना गया है। इस विषय से संबंधित एक शोध से इस बात की जानकारी मिलती है। इस रिसर्च के मुताबिक, बच्चों द्वारा पूछा गया सवाल उनके संज्ञानात्मक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है (12)। इसलिए, माता-पिता को अपने बच्चों को प्रोत्साहित करना चाहिए कि उनके मन में अगर किसी चीज को लेकर हल्की-सी भी शंका हो, तो वह उसके बारे में सवाल पूछें और उसे दूर करें।

10. कामों में बच्चों की मदद लें : माता-पिता अपने कामों में भी बच्चों की मदद लेकर उनकी मेमोरी को बढ़ा सकते हैं। खासकर मां, अगर वो रसोई में कोई डिश बना रही हैं या फिर बच्चे की ही पसंद की कोई चीज बना रही हैं, तो इस दौरान बच्चों से पूछ सकती हैं कि अब क्या डालना है।
इसके अलावा, उनसे कोई दूसरा काम, जैसे – अगर घर में कोई चीज कहीं रखी हो, तो बच्चे को कहें उसे याद करें और फिर उसे ढूंढ कर लाएं। यह एक तरीका हो सकता है बच्चों की याददाश्त को सुधारने का। हालांकि, यह कितना कारगर होगा, इस पर वैज्ञानिक शोध का अभाव है।

11. पर्याप्त पानी पिलाएं : अगर बच्चे के शरीर में पानी की कमी होती है, तो उसका असर भी उनकी याददाश्त पर पड़ सकता है। इसलिए, जरूरी है कि बच्चों को पर्याप्त मात्रा में पानी पिलाते रहें। इस पर हुए शोध भी इस बात का समर्थन करते हैं कि संज्ञानात्मक प्रक्रियाओं (सोचने-समझने, याद करने व ध्यान देने) के लिए पानी का सेवन भी जरूरी है। एकाग्रता को बढ़ाने के लिए पानी पीना आवश्यक होता है (13)

12. पजल्स की मदद लें : पिक्चर पजल एक ऐसा खेल है, जिसमें एक फोटो के कई सारे टुकड़े बिखरे हुए होते हैं, फिर उन टुकड़ों को सही तरीके से जोड़ कर एक तस्वीर पूरी की जाती है। इस गेम के जरिए भी बच्चों की स्मरण शक्ति को बढ़ाने में कुछ हद तक मदद मिल सकती है बच्चों के लिए इनडोर गेम्स के तौर पर इसे एक अच्छा खेल माना जाता है।

इससे संबंधित, एनसीबीआई की वेबसाइट पर एक शोध भी प्रकाशित है, जिसमें बताया गया है कि दिमाग से जुड़ा खेल (जिसमें पजल भी शामिल है) बच्चों में संज्ञानात्मक कार्यों में सुधार करने में कुछ हद तक मददगार साबित हो सकता है (14)

13. चेस की मदद लें : बच्चों के दिमागी विकास के लिए बोर्ड गेम्स को भी महत्वपूर्ण माना गया है। इन गेम्स में सबसे पहला नाम आता है चेस यानी शतरंज का। इस पर हुए शोध बताते हैं कि शतरंज खेलने से बच्चों की संज्ञानात्मक क्षमता में सुधार हो सकता है (15)। ऐसे में अगर बच्चे की उम्र चेस खेलने की है, तो उसकी मेमोरी को बढ़ाने के लिए इस खेल का भी सहारा लेना लाभकारी हो सकता है।

14. बच्चों को पढ़ाने के लिए कहें : बच्चों की याददाश्त को बढ़ाने के लिए समय-समय पर उसे टिचर बनाना भी जरूरी होता है। इसके लिए परिवार के अन्य लोगों की मदद ली जा सकती है। दरअसल, कई बार ऐसा देखा गया है कि बच्चे खेल-खेल में कई चीजों को सीख जाते हैं और अधिक समय तक वह उन्हें याद भी रह जाती है। इस तरह यह प्रक्रिया भी है।

इसके लिए माता-पिता बच्चों को आदेश दे सकते हैं कि जो विषय उन्हें पढ़ाया गया है, वह उन्हें वापस से पढ़ाए। अगर बच्चा उस चीज को अच्छी तरह से समझ चुका होगा, तो आसानी से पढ़ा सकेगा।

वहीं, हो सकता है कि वह बीच-बीच में फंसे और किताब देखे। ऐसे में उन्हें उस चीज को दोबारा से बताकर समझा सकते हैं। इस प्रक्रिया के माध्यम से भी बच्चों के स्मरण शक्ति को मजबूत करने में कुछ हद तक मदद मिल सकती है।

15. बच्चों को बाहर घुमाने ले जाएं : पढ़ाई के अलावा भी बच्चे अन्य माध्यमों से बहुत चीजें सीख सकते हैं। इस क्रम में उन्हें बाहर घुमाना भी शामिल है। अगर बच्चे बाहर जाते हैं, तो वह नई चीजों को सीखने के साथ-साथ बाहरी दुनिया का अनुभव भी करते हैं। इससे बच्चे काफी कुछ सीख सकते हैं। उदाहरण के तौर पर, अगर माता-पिता बच्चे को म्यूजियम घुमाने ले जाते हैं, तो इस दौरान उन्हें अगर ऐतिहासिक चीजों के बारे में बताया जाए, तो उस घटना और पात्र को बच्चे आसानी से लंबे समय तक याद रख सकते हैं। यह और एक विकल्प हो सकता है बच्चों की मेमोरी बढ़ाने का, हालांकि इस पर अभी और शोध की आवश्यकता है।

16. अभ्यास कराएं : अगर किसी भी चीज का अभ्यास बार-बार किया जाए, तो वह चीज दिमाग में लंबे समय तक के लिए बैठ सकती है। इसलिए, बच्चों की स्मरण शक्ति को बढ़ाने के लिए यह तरीका भी बेहद लाभकारी हो सकता है। इसके लिए माता-पिता बच्चों को होमवर्क के तौर कुछ गिनती, पहाड़ा या फिर अल्फाबेट दे सकते हैं और उसे मौखिक या लिखित रूप से बार-बार अभ्यास करने के लिए कह सकते हैं। इससे बच्चे उस चीज को लंबे समय तक याद रख पाएंगे और उनकी याददाश्त भी बढ़ सकती है (2)

17. थोड़ी-थोड़ी करके जानकारी दें : छोटे बच्चों को किसी भी चीज को सीखने में समय लगता है। ऐसे में बच्चों की याददाश्त को मजबूत करने के लिए जरूरी है कि उन्हें किसी भी चीज के बारे में थोड़ा-थोड़ा करके समझा कर पढ़ाया जाए। इससे बच्चे उस चीज को अच्छे से समझ सकेंगे और उसे लंबे समय तक याद भी रख पाएंगे।

कई बार यह भी देखा गया है कि एक बार में अगर बच्चों को अधिक चीज की जानकारी दी जाती है, तो वह किसी भी बात को ठीक ढंग से न सुन पाते हैं और न ही समझ पाते हैं, जिसका नतीजा होता है कि वह उसे तुरंत भूल जाते हैं। इसलिए, उन्हें थोड़ी-थोड़ी करके ही जानकारी देना लाभकारी हो सकता है।

18. जोर-जोर से पढ़ने के लिए कहें : एनसीबीआई की वेबसाइट पर उपलब्ध एक रिसर्च में इस बात की जानकारी साफतौर से मिलती है कि जोर-जोर से पढ़ने से उसका स्पष्ट असर याददाश्त पर पड़ सकता है (16)। अगर किसी चीज को कोई जोर-जोर से पढ़ता है, तो वह दिमाग में जल्दी बैठ सकती है। इसलिए, बच्चों की स्मरण शक्ति को बढ़ाने के लिए उसे जोर-जोर से पढ़ने के लिए कहना लाभकारी हो सकता है। इससे बच्चे की याददाश्त अच्छी होने के साथ-साथ भाषा पर भी पकड़ बन सकती है।

19. एक अच्छा श्रोता बनाएं : अगर किसी चीज को लंबे समय तक याद रखना हो, तो उसके लिए जरूरी है उस चीज के बारे में सही जानकारी। यही चीज बच्चों पर भी लागू होती है। अगर उनके स्मरण शक्त को मजबूत करना है, तो इसके लिए उन्हें एक अच्छा श्रोता बनना जरूरी है। उदाहरण के लिए, अगर बच्चों को स्कूल में शिक्षक कुछ पढ़ाते हैं और अगर बच्चे उस चीज को ध्यानपूर्वक सुनते हैं, तो वह बातें उन्हें लंबे समय तक याद रह सकती है।

20. बच्चों को प्रोत्साहित करें : स्मरण शक्ति को बढ़ाने के लिए बच्चों को प्रोत्साहित करना भी जरूरी है। अगर बच्चा किसी भी पूछे गए सवालों का सही-सही जवाब देता है, तो उसे तुरंत प्रोत्साहित करें। ऐसा करने से बच्चा उस सवाल के जवाब को लंबे समय तक याद रख सकता है। इसलिए, अपने बच्चों को प्रोत्साहित जरूर करें।

तो दोस्तों ये थे बच्चों की याददाश्त बढ़ाने के 20 आसान उपाय। ये उपाय न केवल बच्चों की मेमोरी को बढ़ाने में मददगार साबित हो सकते हैं, बल्कि उनमें बौद्धिक क्षमता और भाषा का विकास करने में भी मदद कर सकते हैं। ऐसे में अब आप बेझिझक यहां बताए गए टिप्स अपना सकते हैं। हम उम्मीद करते हैं कि लेख में बताए गए उपाय आपके काम आएंगे। बच्चों से संबंधित अन्य विषयों के बारे में जानने के लिए जुड़े रहें मॉमजंक्शन के साथ।

References:

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