गर्भावस्था के दौरान पसली में दर्द: कारण, लक्षण व उपचार | Rib Pain During Pregnancy In Hindi

Rib Pain During Pregnancy In Hindi

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गर्भावस्था में महिलाओं के शरीर में कई सारे बदलाव होते हैं। इन्हीं बदलावों के कारण शरीर में कई सारे लक्षण दिखने लगते हैं। शरीर के कई हिस्सों में दर्द होना इन्हीं लक्षणों में से एक है (1)। हालांकि, कई बार लोग इन्हें सामान्य कहते हैं, लेकिन कुछ दर्द ऐसे होते हैं, जिन पर ध्यान देने की जरूरत हो सकती है। प्रेगनेंसी में पसलियों में दर्द होना इन्हीं में से एक है। हो सकता है कई गर्भवती पसलियों में दर्द की समस्या का अनुभव करें। ऐसे में गर्भवती को प्रेगनेंसी में पसलियों में दर्द से जुड़ी जानकारी होनी जरूरी है। तो मॉमजंक्शन के इस लेख में हम प्रेगनेंसी में पसलियों में दर्द से जुड़ी ज्यादा से ज्यादा जानकारी साझा करने की कोशिश कर रहे हैं।

लेख में सबसे पहले जानिए गर्भावस्था के दौरान पसलियों में दर्द कैसा होता है।

गर्भावस्था में पसली का दर्द कैसा होता है?

गर्भावस्था में पसली का दर्द ऐसा महसूस होता है, जैसे कि पसलियां अपनी जगह से अलग हो रही हो। इस दौरान पसली वाले हिस्से में काफी असुविधा महसूस हो सकती है। साथ ही सूजन और छूते समय दर्द का एहसास हो सकता है। यही नहीं, पसली वाले हिस्से में थोड़ा दबाव भी महसूस हो सकता है। इन सबके अलावा, पसली के निचले हिस्से में भी पीड़ा हो सकती है (2)। अगर गर्भावस्था के समय पसली में किसी तरह की चोट लगी हो या फ्रैक्चर हुआ हो, तो शरीर के मुड़ने पर, खांसते वक्त, गहरी सांस लेते समय, हंसने या छींकने पर दर्द का अनुभव हो सकता है (3)

गर्भावस्था में पसली का दर्द कैसा होता है, यह जानने के बाद जानते हैं कि यह दर्द कब होता है।

प्रेगनेंसी में पसली का दर्द कब होता है?

प्रेगनेंसी में पसलियों में दर्द लगभग दूसरी तिमाही के आखिरी समय से लेकर पूरी गर्भावस्था के दौरान रह सकता है। दरअसल, गर्भाशय के आकार के बढ़ने के कारण पेट के अंदरूनी अंगों में दबाव पड़ता है, जिस वजह से दर्द हो सकता है (4) (5)। इसके अलावा, प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में पसलियों के फ्रैक्चर के कारण भी दर्द की समस्या हो सकती है (5)

लेख के इस हिस्से में गर्भावस्था के दौरान पसली में दर्द होने के कारण की चर्चा करेंगे।

गर्भावस्था के दौरान पसली में दर्द होने के कारण

गर्भावस्था के दौरान पसली में दर्द होने के कारण कई सारे हो सकते हैं। ऐसे में ये कारण कुछ इस प्रकार हैं:

1. गर्भाशय का आकार बढ़ना

गर्भावस्था के दौरान, जैसे-जैसे बच्चा बढ़ता है, गर्भाशय भी बढ़ता है। ऐसे में इस कारण पीठ, कमर के साथ-साथ शरीर के कई अन्य हिस्सों में भी दर्द शुरू हो जाता है (4)। दरअसल, बढ़े हुए गर्भाशय का दबाव पसलियों पर पड़ने लगता है। यही कारण है कि गर्भावस्था के दौरान पसली में दर्द होने की संभावना अधिक हो सकती है (5)

2. यूटीआई इंफेक्शन

गर्भावस्था में यूटीआई संक्रमण का जोखिम भी हो सकता है (6)। वहीं, कई बार पसलियों में दर्द का कारण यूटीआई इंफेक्शन भी हो सकता है। दरअसल, पसली में दर्द होना यूटीआई संक्रमण के लक्षणों में से एक है (7)। ऐसे में अगर लगातार पसली में दर्द हो तो बेहतर है इस बारे में डॉक्टरी सलाह ली जाए।

3. हार्मोनल बदलाव

गर्भावस्था के दौरान होने वाले हार्मोनल बदलाव भी हड्डियों और मांसपेशियों के दर्द के कारणों में से एक है (8)। दरअसल, प्रेगनेंसी में हार्मोनल बदलाव के कारण शरीर में कई तरह के लक्षण दिखते हैं (1)। यही हार्मोनल बदलाव मांसपेशियों के साथ-साथ पसली में दर्द का कारण भी बन सकते हैं (2)

4. वजन बढ़ने के कारण

गर्भावस्था के दौरान वजन बढ़ने की समस्या सामान्य है, खासतौर पर, गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में (9)। ऐसे में बढ़ा हुआ वजन भी पसलियों में दर्द का कारण हो सकता है। हालांकि, इस विषय में सीधे तौर पर शोध उपलब्ध नहीं है, लेकिन अनुमान के तौर पर बढ़े हुए वजन को भी पसलियों में दर्द का कारण माना जा सकता है।

5. गलत पॉस्चर

कई बार गलत तरीके से उठना या बैठना भी शरीर में दर्द का कारण बन सकता है (10)। ऐसे में सामान्य दिनों की तरह ही गर्भावस्था के दौरान भी अगर बैठने या सोने की मुद्रा सही नहीं हो, तो पसलियों में दर्द की समस्या हो सकती है।

6. पसली में चोट

गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में पसली के फ्रैक्चर का जोखिम भी हो सकता है। दरअसल, गर्भाशय का आकार बढ़ने के कारण इसका दबाव पसलियों पर पड़ने लगता है, जिस वजह से पसली में फ्रैक्चर का जोखिम हो सकता है। ऐसे में पसली में किसी प्रकार की चोट या फ्रैक्चर भी प्रेगनेंसी में पसली में दर्द का कारण हो सकता है (5)

अब जानते हैं गर्भावस्था के दौरान पसली में दर्द होने के लक्षणों के बारे में।

प्रेगनेंसी में पसली में दर्द होने के लक्षण

प्रेगनेंसी में पसली में दर्द के लक्षण सामान्य दिनों में पसली में दर्द के लक्षणों जैसे ही हो सकते हैं। इसलिए, इसके लक्षण एक जैसे हो सकते हैं। ऐसे ही कुछ सामान्य लक्षणों की जानकारी हम नीचे दे रहे हैं (3) (11):

  • पसली में छुने से दर्द होना।
  • पसलियों में असुविधा महसूस होना।
  • सांस लेने में दर्द या असुविधा महसूस होना।
  • पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द होना या सीने के नीचे के हिस्से में दर्द होना।
  • 7 से 10वें पसली के बीच दर्द होना।
  • मतली की समस्या होना।
  • खाने के बाद पसली के नीचे के हिस्से में असुविधा महसूस होना।

वहीं अगर पसली में किसी प्रकार की चोट हो तो नीचे बताए गए लक्षण दिख सकते हैं (3) (12):

  • गहरी सांस लेने पर दर्द।
  • खांसते या छींकते वक्त दर्द होना
  • हंसते समय दर्द का अनुभव होना।
  • सांस लेने में असुविधा महसूस होना।
  • पसली की मांसपेशियों में ऐंठन महसूस होना।
  • झुकते या उठते बैठते वक्त दर्द होना।

गर्भावस्था के दौरान पसली में दर्द होने के लक्षणों को तो आपने जान लिया अब बारी है दर्द के निदान की।

प्रेगनेंसी में पसली का दर्द होने के निदान

अब बारी आती गर्भावस्था के दौरान होने वाले पसलियों में दर्द के निदान के बारे में जानने की। प्रेगनेंसी में पसली में दर्द का निदान डॉक्टर कुछ हद तक सामान्य स्थिति की तरह ही कर सकते हैं, जो कुछ इस प्रकार हैं:

  • लक्षण की जानकारी – डॉक्टर गर्भवती से उनके पसली में दर्द के लक्षणों के बारे में पूछ सकते हैं। गर्भवती किस तरह का दर्द महसूस कर रही हैं और दर्द सटीक तौर पर पसली के किस हिस्से में हो रहा है (3)
  • अन्य जानकारी लेना – लक्षणों के अलावा, डॉक्टर महिला की ड्यू डेट के बारे में भी जानकारी ले सकते हैं। दर्द की अवधि के बारे में पूछ सकते हैं, जैसे – कितने दिनों से दर्द है या कितने देर तक दर्द रहता है। चलने-फिरने या उठने-बैठने में भी दर्द होता है या नहीं। उठने-बैठने के पॉस्चर आदि, के बारे में भी सामान्य जानकारी ले सकते हैं।
  • यूरिन टेस्ट – जैसे कि हमने लेख में पहले ही जानकारी दी है कि यूरिन इन्फेक्शन भी पसलियों में दर्द के कारणों में से एक है (7)। वहीं, प्रेगनेंसी के दौरान मूत्र मार्ग संक्रमण (यूटीआई) का जोखिम भी हो सकता है (13)। ऐसे में इसकी पुष्टि के लिए हो सकता है डॉक्टर गर्भवती को यूरिन टेस्ट की सलाह भी दें।
  • शारीरिक परीक्षण – डॉक्टर शारीरिक परीक्षण करके भी गर्भवती के पसली में दर्द का निदान कर सकते हैं। दर्द प्रभावित जगह को छूकर या दबाकर चेक कर सकते हैं। इसके अलावा, गर्भवती की बीपी की भी जांच कर सकते हैं।
  • एक्स-रे – कुछ मामलों में डॉक्टर एक्स-रे कराने की सलाह भी दे सकते हैं। हालांकि, प्रेगनेंसी के दौरान एक्स-रे कराने को लेकर महिलाओं के मन में दुविधा हो सकती है। शोध की मानें तो सीने, सिर या साइनस का एक्स-रे सुरक्षित हो सकता है। वहीं, प्रेगनेंसी में पेट, रीढ़ की हड्डी या पेल्विस के एक्स-रे से बच्चे में कैंसर का जोखिम हो सकता है (14)। ऐसे में गर्भावस्था में एक्स-रे कराना है या नहीं यह पूरी तरह से डॉक्टर का फैसला होगा।

अब बात करते हैं कि गर्भावस्था के दौरान पसलियों के दर्द से राहत कैसे पा सकते हैं।

गर्भावस्था के दौरान पसली के दर्द से राहत पाने के उपाय

गर्भावस्था के दौरान पसलियों में होने वाला दर्द कष्टदायक हो सकता है, इसलिए हम कुछ घरेलू तरीके बताएंगे कि आखिर इस दर्द से राहत पाने के क्या-क्या उपाय हो सकते हैं। ध्यान रहे ये उपाय हल्के-फुल्के पसली के दर्द के लिए है, अगर दर्द की समस्या तीव्र है या इन उपायों के बाद भी बनी रहती है तो डॉक्टरी परामर्श जरूर लें।

1. तकिए का सहारा लें

हल्की-फुल्की पसली में दर्द के दौरान घरेलू उपाय के तौर पर तकिए का सहारा ले सकते हैं। बाजार व ऑनलाइन कई तरह के प्रेगनेंसी पिलो मौजूद हैं। ऐसे में गर्भावस्था के दौरान शरीर की मांसपेशियों व हड्डियों के दर्द के लिए मैटरनिटी या प्रेगनेंसी पिलो अच्छा विकल्प हो सकता है (1)। दरअसल, इस तकिए के उपयोग से गर्भावस्था में पीठ, कमर और शरीर के अन्य हिस्सों को सहारा मिलता है, जिससे दर्द से काफी हद तक आराम मिल सकता है।

2. ढीले आरामदायक कपड़े पहनें

प्रेगनेंसी के समय आरामदायक कपड़े पहनने की सलाह दी जाती है (15)। दरअसल टाइट-फिटिंग कपड़ें शरीर के हिस्सों में दबाव उत्पन्न कर सकते हैं, जिससे पसली का दर्द बढ़ सकता है। इसलिए कोशिश करें कि ढीले कपड़े व सही मैटरनिटी ब्रा का चुनाव करें, जो शरीर के लिए आरामदेह होने के साथ-साथ पसली में दर्द से भी राहत दे सके।

3. मालिश करवाएं

गर्भावस्था में हल्की मालिश कराना भी पसली में दर्द से राहत दिलाने में सहायक हो सकता है। शोध की मानें तो गर्भावस्था के 14वें से 30वें सप्ताह के दौरान मालिश करवाना फायदेमंद हो सकता है। गर्भावस्था में मालिश से सिरदर्द, पीठ-कमर दर्द, मांसपेशियों में ऐंठन जैसी समस्याओं से बचाव हो सकता है (16)

सिर्फ शरीर में होने वाले दर्द ही नहीं, बल्कि मालिश से अच्छी नींद और तनाव जैसी समस्याओं से भी राहत मिल सकती है (17)। ऐसे में माना जा सकता है कि मालिश कराने से पसलियों के दर्द से राहत मिल सकती है। हालांकि, ध्यान रहे मालिश कराने से पहले एक बार डॉक्टरी सलाह जरूर लें, खसतौर पर वे गर्भवती जिनकी गर्भावस्था में किसी प्रकार की जटिलता हो। साथ ही मालिश किसी एक्स्पर्ट से ही कराएं।

4. गर्म पानी

स्टडी के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान गुनगुने पानी से नहाना सुरक्षित माना जा सकता है (18)। एक अन्य शोध की मानें तो गर्म पानी से नहाने से त्वचा में रक्त प्रवाह और ऑक्सीजन युक्त हीमोग्लोबिन को बढ़ाने में मदद मिल सकती है, जो मांसपेशियों के थकान व दर्द को कम करने में मददगार हो सकता है (19)। ऐसे में इन तथ्यों के आधार पर माना जा सकता है कि गर्भावस्था में गुनगुने पानी से स्नान पसलियों से दर्द में राहत दिला सकता है। हालांकि, अगर मन में थोड़ा भी संशय हो तो इस बारे में डॉक्टरी सलाह जरूर लें।

5. व्यायाम

प्रेगनेंसी में व्यायाम करना भी पसली में दर्द से राहत पाने के लिए अच्छा विकल्प हो सकता है। दरअसल, गर्भावस्था के दौरान व्यायाम करने के कई फायदे हो सकते हैं, जैसे – पोस्चर में सुधार, वजन संतुलित रहना, पीठ-कमर दर्द से आराम आदि (20)। वहीं, हमने पहले ही जानकारी दी है कि वजन बढ़ना या सही पोस्चर न होना पसली में दर्द का कारण हो सकता है। इस आधार पर माना जा सकता है कि प्रेगनेंसी के दौरान हल्के-फुल्के एक्सरसाइज से पसली के दर्द से राहत मिल सकती है। व्यायाम के अलावा, गर्भावस्था में योग भी किया जा सकता है (21)। हालांकि, गर्भावस्था में व्यायाम या योग करने से पहले एक बार डॉक्टरी सलाह जरूर लें। हमेशा एक्सपर्ट की देखरेख में ही व्यायाम या योग करें।

6. सही पोस्चर

जैसे कि हमने लेख में पहले ही जानकारी दी है कि सही पोस्चर न होने के कारण भी शरीर में दर्द हो सकते हैं। ऐसे में उठने-बैठने का अगर सही पोस्चर न हो तो पसली में दर्द का जोखिम भी हो सकता है। इसलिए, इसके जोखिम को कम करने के लिए सही पोस्चर का ध्यान रखें। लगातार एक जगह बैठे या खड़े रहने से बचें और हमेशा सहारा लेकर उठे-बैठे या खड़े हों।

7. पीछे झुककर बैठें

सही पोस्चर के साथ-साथ बैठने का ध्यान रखना भी जरूरी है। ऐसे में जब भी गर्भावस्था के दौरान बैठें तो अपने पीठ को सहारा देकर बैठें। हो सके तो कुर्सी पर बैठते वक्त कुशन से अपने पीठ और कमर को सहारा दें। बेड पर बैठते वक्त भी अपने कमर को सहारा देकर बैठें, ताकि इससे पीठ-कमर के दर्द के साथ-साथ पसली के दर्द से भी राहत मिल सके।

8. ब्रेक लें

गर्भावस्था के दौरान लगातार खड़े व बैठे रहने से भी यह समस्या हो सकती है। इसलिए गर्भावस्था के दौरान पसली का दर्द के घरेलू इलाज के तौर पर बेहतर है लगातार खड़े या बैठे रहने से बचें। थोड़ी-थोड़ी देर में ब्रेक लें, टहलते रहें, इससे न सिर्फ पसलियों के दर्द से आराम मिल सकता है, बल्कि मन भी बहल सकता है।

अब प्रेगनेंसी में पसली के दर्द को कम करने के लिए बचाव के बारे में भी जान लीजिए।

प्रेगनेंसी में पसली के दर्द से बचाव

ऐसा क्या किया जाए कि प्रेगनेंसी में पसलियों में दर्द बचाव हो सके। ऐसे में यहां हम प्रेगनेंसी में पसलियों में दर्द से बचाव के कुछ टिप्स बता रहे हैं। ये टिप्स कुछ हद तक प्रेगनेंसी में पसलियों में दर्द के जोखिम को कम करने में सहायक हो सकता है:

  • प्रेगनेंसी में पसलियों में दर्द से बचाव के लिए गर्भवती योग या व्यायाम का सहारा ले सकती हैं (20) (21)। हालांकि, ध्यान रहे कि डॉक्टरी सलाह के बाद ही व्यायाम व योग करें। साथ ही एक्स्पर्ट की देखरेख में ही करें।
  • लगातार एक जगह बैठने या खड़े रहने से बचें। देर तक खड़े या बैठे न रहें।
  • ज्यादा टाइट फिटिंग कपड़े पहनने से बचें।
  • सही पौष्टिक डाइट लें। खुद को हायड्रेट रखें।
  • झटके से उठे या बैठे ना।
  • भारी सामान उठाने से बचें।

इन सभी बातों को जानने के साथ डॉक्टर से सलाह कब लेनी चाहिए ये भी जानना जरूरी है।

डॉक्टर से कब सलाह लें

गर्भावस्था में पसली का दर्द अगर घरेलू उपाय करने के बाद भी ठीक न हो और लगातार हो। इसके अलावा, अगर दर्द असहनीय हो, तो डॉक्टरी सलाह जरूर लें। वहीं, अगर चोट के कारण पसली में दर्द हो तो बुखार, खांसी, दर्द प्रभावित जगह पर नीला-पीला निशान हो सकता है (23)। ऐसे में ये लक्षण दिखे तो भी डॉक्टरी सलाह जरूर लें।

गर्भावस्था के दौरान छोटी से छोटी चीज का ध्यान रखना आवश्यक है। ऐसे में प्रेगनेंसी में पसली में दर्द की समस्या को भी अनदेखा नहीं किया जा सकता है। इसलिए, इससे जुड़ी जानकारियों को ध्यान में रखकर गर्भावस्था में पसली के दर्द की परेशानी को कुछ हद तक कम किया जा सकता है। ऐसे में उम्मीद है कि इस लेख में दी गई जानकारियां गर्भावस्था में पसली के दर्द की परेशानी के लिए कुछ हद तक उपयोगी होंगे। वहीं, अगर दर्द लगातार हो तो डॉक्टरी सलाह लेने से पीछे न हटें। गर्भावस्था से जुड़े ऐसे ही अन्य लेख पढ़ने के लिए बनें रहें मॉमजंक्शन के साथ।

References:

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1. Aches and pains during pregnancy By Medlineplus
2. Prevalence Perception and Risk Factors for Musculoskeletal Discomfort among Pregnant Women in Southeast Nigeria By Clinmed journals
3. Ribcage pain By Medlineplus
4. Body changes and discomforts By women’s health
5. Spontaneous rib fracture during pregnancy. A case report and review of the literature By NCBI
6. Urinary Tract Infection In Pregnancy By NCBI
7. Urinary Tract Infections By Medlineplus
8. Musculoskeletal pain and symptoms in pregnancy: a descriptive study By NCBI
9. Pregnancy and birth: Weight gain in pregnancy By NCBI
10. Posture By Better health
11. Painful Rib Syndrome By journals sagepub
12. Rib injuries By Better health
13. Urinary Tract Infections In Pregnancy By NCBI
14. Fetal radiation doses and subsequent risks from X-ray examinations: Should we be concerned? By NCBI
15. Health Tips for Pregnant Women By NIH
16. Effect of Therapeutic Massage on Relieving Pregnancy Discomforts By Researchgate
17. Pregnant women benefit from massage therapy By NCBI
18. Heat stress and fetal risk. Environmental limits for exercise and passive heat stress during pregnancy: a systematic review with best evidence synthesis By NCBI
19. Physiological functions of the effects of the different bathing method on recovery from local muscle fatigue By NCBI
20. Pregnancy and exercise By Better health
21. Systematic Review of Yoga for Pregnant Women: Current Status and Future Directions By NCBI
22. Eating right during pregnancy By Medlineplus
23. Bruised rib care By Medlineplus